Table of Contents
Toggle8 बीमारियों से बचें : बडी आंत (कोलन) को साफ रखें : ध्यान रखें कि बड़ी आंत की उपयोगिता बहुत अधिक है।
- MANAV SHARIR MEIN BADI AANT KI UPYOGITA बहुत अधिक है। बड़ी आंत का कार्य केवल अपशिष्ट संग्रहीत करना और उसे मल में बदलना ही नहीं है बल्कि यह पाचन तंत्र का अभिन्न अंग है। “बड़ी आंत शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के साथ-साथ जल और खनिजों के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो संपूर्ण पाचन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।”
— डॉ. सुमन अग्रवाल, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, एम्स नई दिल्ली - मानव शरीर में बडी आंत की लम्बाई लगभग डेढ मीटर या पांच फिट होती है।है। बड़ी आंत छोटी आंत से बहुत चौडी होती है। बड़ी आंत का मुख्य कार्य वो पदार्थ जो भोजन के रूप में पचने में असमर्थ होते हैं उन पदार्थों से पानी व लवण को अवशोषित कर बचे हुए अपशिष्ट से छुटकारा दिलाती है। बड़ी आंत को वृहदान्त कहा जाता है तथा अंग्रेजी में इसे ( Large Intestine) कहते हैं। 8 बीमारियों से बचें बडी आंत (कोलन) को साफ रखें ।
बड़ी आंत के मुख्य भाग :
1: कोलन (Colon) : कोलन का कार्य अपशिष्ट पदार्थों को संचित करना और पानी को पुन: अवशोषित करना है। कोलन के चार भाग होने हैं ऐसेंडिंग कोलन, ट्रांस्वर्स कोलन, डिसेडिंग कोलन और सिग्माइड कोलन जो कि पाचन क्रिया के अंतिम चरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2: रेक्टम (Rectum) : यह बड़ी आंत का अंतिम भाग है जो कि मलत्याग की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रेक्टम (Rectum) कोलन के अंत में स्थित होता है और इसका कार्य अपशिष्ट पदार्थों को एकत्रित करना और मलत्याग के समय बाहर निकालने की प्रक्रिया को नियंत्रित करना है।
3: पाचन (Digestion) : पाचन की क्रिया में बड़ी आंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह आंतरिक तरल पदार्थों का पुन: अवशोषण कर भोजन के अवशेषों को मल में बदलती है जो कि पाचनतंत्र के समुचित कार्य के लिये बहुत ही आवश्यक है।
4: अपशिष्ट (Waste) : कोलन द्वारा पानी के अवशोष्ण के पश्चात बड़ी आंत अपशिष्ट पदार्थों को ठोस मल में बदल देती है जो अंतत: रेक्टम के माध्यम से शरीर से बाहर निकलते हैं। इस प्रकार बड़ी आंत अपशिष्ट पदार्थों को संचित करने का कार्य भी करती है।
5: माइक्रोबायोटा (Microbiota) ) : बड़ी आंत में माइक्रोबायोटा या वेक्टीरियल फलोरा का महत्वपूर्ण योगदान होता है। ये वैक्टेरिया पाचनतंत्र को सहयोग प्रदान करते हैं, विटामिन का उत्पादन करते हैं और आंतरिक स्वास्थ्य को बनाये रखते हैं। यह सूक्ष्मजीवी शरीर की रो्ग प्रतिरोधक क्षमता को भी बनाये में सहायता प्रदान करते हैं।
बड़ी आंत से संबंधित बीमारियां :
ध्यान रखें कि बड़ी आंत से संबंधित अनेक स्वास्थ्य समस्याऐं हो सकती हैं जिनमें से प्रमुख निम्न हैं
1. अल्सरेटिव कोलाइटिस :
A. अल्सरेटिव कोलाइटिस बड़ी आंत की सबसे भीतरी सतह को प्रभावित करता है जिसे कोलन और मलाशय भी कहा जाता है। यह एक आंत्र रोग (IBD) है जो पाचन तंत्र में सूजन और अल्सर (ulcers) का कारण् बनता है। जिससे पेट में दर्द, दस्त, और खून आना जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। अल्सरेटिव कोलाइटिस एक गंभीर बीमारी है किंतु वर्तमान समय में ऐसे कई नये उपचार हैं तो इसके लक्षणों को कम कर सकते हैं जिससे लंबे समय तक मरीज को आराम मिल सकता है।
क्रोहन रोग :
B. यह रोग आंत (IBD) की किसी भी दीवार को प्रभावित कर सकती है। क्रोहन रोग अक्सर धीरे धीरे शुरू होता है और और समय के साथ इसकी स्थिति बदतर होती जाती है। लेकिन जब ये बड़ी आंत को प्रभावित करता है तो इसके लक्षण कोलाइटिस के समान हो सकते हैं। क्रोहन रोग में सेब की चटनी, केले, पकी हुई सब्जी जैसे हल्के खादय पदार्थों को सेवन करें ये खादय पदार्थ आपको बिना जलन पैदा किये आवश्यक पोषण प्राप्त करने में मदद कर सकते है।
2. पाइल्स (Hemorrhoid) :
- पाइल्स, या बवासीर, बड़ी आंत के अंत में नसों का सूजन होता है। यह आंतरिक या बाहरी हो सकते हैं और आमतौर पर दर्द, खुजली, और खून आने की समस्या पैदा करते हैं। इस बीमारी में रोगी को उठने बैठने में काफी परेशानी का सामना करना पडता है क्योंकि इस बीमारी में गुदा के अंदरूनी और बाहरी हिस्से और मलाश्य (Rectum) के निचले हिस्से की शिराओं में सूजन पैदा हो जाती है जिस कारण से ऐनस के अंदर और बाहर किसी एक जगह पर मस्से जैसे निर्मित हो जाते हैं।
- सामान्यतः गलत खान-पान, अपच, पेट में दबाव, या गर्भावस्था के दौरान बढ़ी हुई रक्त संचार के कारण हो सकती है। इसके अलावा, लंबे समय तक बैठे रहने, भारी भार को उठाने के कारण भी हो सकता है।
3. डाइवर्टीकुलाइसिस (Diverticulitis) :
डाइवर्टीकुलाइटिस तब होता है जब बड़ी आंत की दीवार में छोटे-छोटे थैले (diverticula) बन जाते हैं और इनमें सूजन या संक्रमण हो जाता है। इसके लक्षणों में पेट में दर्द, बुखार, और कब्ज शामिल हो सकते हैं। इस बीमारी में कई लक्षण पैदा होते हैं कब्ज, जी मिचलाना, स्टूल में खून आना, उल्टी और फीवर आदि। इस रोग का प्रमुख कारण खराब लाइफ स्टाइल और मोटापा तथा विटामिन डी की कमी से भी इस रोग का खतरा होता है।
4. कोलोरेक्टल केंसर (Colorectal Cancer) :
कोलोरोक्टल कैंसर मुख्य रूप से बड़ी आंत और गुदा में होने वाला कैंसर है जहां पाचन से अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं, कोलन पचने वाले भोजन से विटामिन और पोषक तत्वों को अवशोषित करता है इसकी शुरूआत तब होती है जब असमान्य कोशिकाऐं अनियंत्रित रूप से बनती है और मलाशय की दीवार और उसके आसपास के ऊतकों पर आक्रमण करती है। कोलोन कैंसर आमतौर पर आंतरिक घावों से शुरू होता है और समय के साथ कैंसर में बदल सकता है। इसके लक्षणों में रक्तस्त्राव, पेट में ददर् और वजन में कमी शामिल हो सकते हैं।
5. इरीटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) :
IBS एक कार्यात्मक आंत्र विकार है जिसमें आंत की संरचना में कोई बदलाव नहीं होता लेकिन यह पेट दर्द, सूजन और आंत की गतिविधियों में परिवर्तन (जैसे दस्त या कब्ज) पैदा करता है। यह स्थिति दीर्घकालीन हो सकती है जिसका इलाज आहार और जीवनशैली में परिवर्तन से किया जाता है। यह एक आम लेकिन काफी असुविधाजनक गेस्ट्रोइंटेस्टिनल बीमारी है जो आपकी आतों को प्रभावित करती है। इस रोग के लक्षण हर व्यक्ति में अलग अलग होते हैं और साधारण से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। किसी व्यक्ति में तब होता है जब इसके लक्षण 3 महीने या उससे अधिक समय तक हर महीने कम से कम 3 दिन तक मौजूद रहते हैं।
6. गैस्ट्रोएन्टेटिस (Gastroenteritis) :
यह स्थिति बड़ी आंत की सूजन का कारण बन सकती है, जो आमतौर पर वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण की वजह से होती है। इसके लक्षणों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द शामिल होते हैं। यह एक आम और संक्रामक बीमारी है।
7. कब्ज (Constipation) :
यह एक सामान्य समस्या है जिसमें व्यक्ति की आंत की क्रियावली धीमी हो जाती है इस कारण से मलत्याग में कठिनाई होती है। यह बड़ी आंत की दीवार में सूजन और दर्द का कारण बन सकता है।
8. आटोनिम्यून डिस्आर्डर (Autonimune Disorder ) :
किसी किसी केस में, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बड़ी आंत को गलती से हमला कर सकती है, जिससे सूजन और अन्य समस्याऐं हो सकती हैं। उदाहरण के लिये क्रोन की बीमारी एक ऑटोनिम्यून डिस्आर्डर है जो आंतों की दीवारों को प्रभावित करता है। इन समस्याओं की पहचान और इलाज के लिये चिकित्सा सलाह महत्वपूर्ण है। उचित आहार, जीवनशैली में परिवर्तन और समय पर चिकित्सा देखभाल से इन रोगों का प्रबंधन किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति बड़ी आंत से संबंधित लक्षणों का अनुभव करता है , तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिये।
निष्कर्ष:
बड़ी आंत का मुख्य कार्य भोजन के अपशिष्ट को संकलित करना और शरीर से बाहर निकालना है। इसमें पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का अवशोषण भी होता है, जिससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती। बड़ी आंत में लाभकारी बैक्टीरिया होते हैं, जो पाचन में मदद करते हैं और विटामिन K व B12 का संश्लेषण करते हैं। यह इम्यून सिस्टम को भी समर्थन देती है।
Disclaimer:
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी चिकित्सा, स्वास्थ्य, या कानूनी सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी निर्णय से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श करें।
- आपको यह पोस्ट पढ़ने में रुचि हो सकती है:
- “स्कैल्प को बनाएं हेल्दी, पाएं घने और मजबूत बाल”
Frequentky Asked Question
इसमें पानी, खनिज और विटामिन का अवशोषण होता है।
हां, जैसे क्रोहन रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस।
प्रत्यक्ष रूप से नहीं, लेकिन बड़ी आंत अपचित भोजन को प्रोसेस करके उसमें से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स अवशोषित करती है, जिससे शरीर को पोषण मिलता है और मल को ठोस रूप मिलता है।
बड़ी आंत में लाभकारी बैक्टीरिया (Gut Flora) पाए जाते हैं जो विटामिन K और B-कॉम्प्लेक्स के निर्माण में सहायता करते हैं तथा पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखते हैं।
फाइबर युक्त आहार लें, पर्याप्त पानी पिएं, प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ (जैसे दही) का सेवन करें और नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करें। इससे बड़ी आंत स्वस्थ रहती है और पाचन क्रिया सुचारू बनी रहती है।