पेट में कीड़े से बच्चों को कैसे बचाएं – घरेलू नुस्खे और मेडिकल टिप्स

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परिचय

Worms in children stomach treatment – बचपन में अक्सर एक आम समस्या देखी जाती है – पेट में कीड़े (Intestinal Worms in Children)। यह समस्या केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि शहरों में भी तेजी से बढ़ रही है। समय पर पहचान और सही उपचार न मिलने पर यह बच्चों की सेहत को कमजोर कर सकती है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कि बच्चों के पेट में कीड़े क्यों होते हैं, इसके प्रमुख लक्षण क्या हैं, इसका घरेलू और चिकित्सीय उपचार कैसे किया जा सकता है और किन सावधानियों को अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है।

Worms in children stomach treatment

बच्चों के पेट में कीड़े क्यों होते हैं? (Causes of Intestinal Worms in Children)

पेट में कीड़े होने की मुख्य वजह गंदगी और संक्रमण है। इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी हैं –

  1. साफ-सफाई की कमी: हाथ धोए बिना खाना खाना, मिट्टी या धूल से संक्रमण।
  2. अस्वच्छ भोजन: अधपका मांस या दूषित सब्जियां।
  3. दूषित पानी पीना: खुले या असुरक्षित स्रोत का पानी।
  4. कमजोर इम्यूनिटी: रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना।
  5. नंगे पांव चलना: मिट्टी में मौजूद कीड़े पैरों से शरीर में प्रवेश।

बच्चों के पेट में कीड़े होने के लक्षण (Symptoms)

अगर बच्चा निम्न लक्षण दिखाए तो पेट में कीड़े हो सकते हैं:

  • लगातार पेट दर्द
  • भूख न लगना या ज्यादा भूख लगना
  • वजन कम होना
  • दांत पीसना और नींद में बेचैनी
  • गुदा में खुजली
  • एनीमिया और थकान

बच्चों में कीड़े का घरेलू इलाज

1. लहसुन – प्राकृतिक एंटी-पैरासाइटिक

लहसुन बच्चों के पेट में कीड़े खत्म करने का सबसे असरदार प्राकृतिक उपाय है। इसमें मौजूद सल्फर कंपाउंड आंतों के परजीवियों को मारकर बाहर निकालने में मदद करता है। रोज़ाना सुबह खाली पेट 1–2 लहसुन की कली बच्चों को खिलाने से कीड़े की समस्या धीरे-धीरे कम हो सकती है।

2. अजवाइन और नमक

अजवाइन पेट की पाचन शक्ति को बढ़ाती है और आंतों की सफाई में सहायक होती है। अगर इसे नमक के साथ मिलाकर दिया जाए तो यह पेट के कीड़ों को खत्म करने में कारगर माना जाता है। बच्चों को हल्की-सी अजवाइन सेंककर ऊपर से नमक मिलाकर देने से कीड़े निकलने में राहत मिल सकती है।

3. कद्दू के बीज

कद्दू के बीज प्राकृतिक एंटी-पैरासाइटिक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें मौजूद कुकुर्बिटासिन नामक तत्व कीड़ों की गतिविधि को कमजोर कर उन्हें आंतों से बाहर निकाल देता है। बच्चों को खाली पेट कद्दू के बीज खिलाना या पाउडर बनाकर दूध में मिलाना पेट के कीड़े निकालने का सुरक्षित उपाय है।

4. हल्दी वाला दूध

हल्दी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-पैरासाइटिक गुण पेट के कीड़ों को खत्म करने में सहायक होते हैं। बच्चों को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर देना चाहिए। यह न केवल पेट के कीड़े मारता है बल्कि पाचन को भी दुरुस्त करता है और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

5. गाजर का सेवन

गाजर फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो आंतों को साफ करने और कीड़ों को बाहर निकालने में मदद करती है। बच्चों को सुबह खाली पेट गाजर खाने से पेट के कीड़े धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं। नियमित रूप से गाजर का सेवन करने से पाचन मजबूत होता है और दोबारा कीड़े होने की संभावना कम हो जाती है। 

ये सारे घरेलू नुस्खे तभी प्रभावी हैं जब इन्हें नियमित और सही मात्रा में दिया जाए। लेकिन अगर लक्षण गंभीर हों तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए।

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Disclaimer: यह लिंक बिना एफ़िलिएट आईडी के साझा किया गया है और केवल जानकारी/संदर्भ के लिए है। किसी भी दवा, सप्लीमेंट या हर्बल उत्पाद को अपने बच्चे को देने से पहले कृपया बाल रोग विशेषज्ञ या डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। लेखक/साइट इस लिंक पर उपलब्ध किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता या प्रभाव के लिए उत्तरदायी नहीं है।

बच्चों के पेट में कीड़े के चिकित्सीय उपचार (Treatment)

1. डिवॉर्मिंग टेबलेट्स: Albendazole या Mebendazole

पेट के कीड़े खत्म करने के लिए सबसे आम दवा Albendazole और Mebendazole है। ये दवाएं आंतों में मौजूद परजीवियों को मारकर शरीर से बाहर निकालती हैं। आमतौर पर बच्चों को हर 6 महीने में एक बार डिवॉर्मिंग टेबलेट देना लाभकारी माना जाता है।

2. डॉक्टर की सलाह अनुसार खुराक

हर बच्चे की उम्र और वजन अलग होता है, इसलिए दवा की सही खुराक केवल डॉक्टर ही तय कर सकते हैं। बिना परामर्श के दवा देने से नुकसान हो सकता है। डॉक्टर बच्चे की स्थिति देखकर उचित खुराक और दवा का समय बताते हैं, जिससे सुरक्षित और प्रभावी इलाज हो सके।

3. स्कूलों में डिवॉर्मिंग कैम्प

भारत में सरकार द्वारा समय-समय पर स्कूलों में डिवॉर्मिंग कैम्प आयोजित किए जाते हैं। इनमें बच्चों को मुफ्त में कीड़े मारने की दवा दी जाती है। यह राष्ट्रीय स्तर पर चलाया जाने वाला कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य सभी बच्चों को आंतों के कीड़ों से बचाना और उनकी सेहत को सुरक्षित रखना है।

ये मेडिकल उपचार घरेलू नुस्खों के साथ मिलकर और भी असरदार साबित हो सकते हैं, लेकिन प्राथमिकता हमेशा डॉक्टर की सलाह को देनी चाहिए।

बच्चों को पेट के कीड़े से बचाने के उपाय

1. खाने से पहले हाथ धोना

बच्चों को हर बार खाने से पहले साबुन और स्वच्छ पानी से हाथ धोने की आदत डालनी चाहिए। गंदे हाथों से कीटाणु और परजीवी पेट में चले जाते हैं, जिससे कीड़े पनपते हैं। सही तरीके से हाथ धोने से संक्रमण की संभावना काफी कम हो जाती है।

2. नाखून छोटे और साफ रखना

लंबे नाखूनों में मिट्टी और गंदगी आसानी से जमा हो जाती है। बच्चे अक्सर हाथ मुंह में डालते हैं, जिससे परजीवी आंतों में पहुंच सकते हैं। इसलिए बच्चों के नाखून हमेशा छोटे और साफ रखने चाहिए, ताकि कीड़े पैदा होने का खतरा कम हो सके।

3. घर का बना ताजा भोजन देना

बच्चों को हमेशा ताजा और घर का बना भोजन देना चाहिए। बासी या बाहर का अस्वच्छ खाना पेट में संक्रमण और कीड़े की समस्या को बढ़ा सकता है। संतुलित और पौष्टिक आहार से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर आंतों के कीड़ों से लड़ने में सक्षम बनता है।

4. साफ पानी का सेवन कराना

अस्वच्छ या गंदा पानी बच्चों के पेट में कीड़े पैदा करने का बड़ा कारण है। बच्चों को हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिलाना चाहिए। बोतल और ग्लास भी साफ होना जरूरी है। सुरक्षित और स्वच्छ पानी का सेवन पेट की बीमारियों और कीड़ों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

5. पालतू जानवरों की नियमित सफाई

पालतू जानवरों से बच्चों को प्यार होता है, लेकिन उनकी सफाई पर ध्यान न देने से परजीवी बच्चों तक पहुंच सकते हैं। कुत्ते-बिल्ली को समय-समय पर नहलाना और उनकी जांच कराना जरूरी है। पालतू जानवरों के संपर्क के बाद बच्चों को हाथ धोने की आदत डालना भी कीड़े से बचाव का आसान उपाय है।

ये सभी सावधानियां मिलकर बच्चों को पेट के कीड़ों से सुरक्षित रखने में मदद करती हैं और लंबे समय तक उनकी सेहत को बेहतर बनाती हैं।

बच्चों में पेट के कीड़े – कब डॉक्टर से संपर्क करें?

1. बार-बार उल्टी या दस्त होना -

अगर बच्चे को बार-बार उल्टी या दस्त हो रहे हैं तो यह संकेत है कि पेट में कीड़े गंभीर स्तर तक बढ़ चुके हैं। लगातार उल्टी और दस्त से शरीर में पानी और नमक की कमी हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

2. खून की कमी और कमजोरी

पेट के कीड़े बच्चों के खून से पोषण चूस लेते हैं, जिससे एनीमिया और कमजोरी हो सकती है। अगर बच्चा हमेशा थका-थका लगे, चेहरा पीला हो और पढ़ाई या खेल में सक्रिय न हो, तो यह खून की कमी का लक्षण है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

3. दवा लेने के बाद भी कीड़े बने रहना

कई बार घरेलू उपाय या डिवॉर्मिंग दवाएं लेने के बावजूद बच्चों के पेट में कीड़े बने रहते हैं। अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें या दोबारा बार-बार हों, तो विशेषज्ञ बाल रोग चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए ताकि सही जांच और उचित उपचार हो सके।

4. लगातार वजन घटना

अगर बच्चा सामान्य खान-पान के बावजूद लगातार दुबला होता जा रहा है और वजन बढ़ने के बजाय घट रहा है, तो यह कीड़ों के कारण हो सकता है। कीड़े शरीर को मिलने वाले पोषण को अवशोषित कर लेते हैं। ऐसी स्थिति में देर किए बिना डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।

निष्कर्ष

बच्चों के पेट में कीड़े होना एक आम समस्या है, लेकिन यदि इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। साफ-सफाई का ध्यान रखकर, समय पर दवा देकर और बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आदत डालकर इस परेशानी से बचा जा सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों में लक्षण दिखते ही तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें और नियमित रूप से डिवॉर्मिंग करवाएं।

अस्‍वीकरण:

इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से लिखी गई है। यह किसी चिकित्सक की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी तरह का उपचार या सेवन शुरू करने से पहले कृपया योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

👉 2 से 10 साल की उम्र के बच्चों में यह समस्या सबसे अधिक देखने को मिलती है।

👉 हां, लंबे समय तक इलाज न होने पर ये बच्चों में एनीमिया, कुपोषण और विकास रुकने जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

👉 डॉक्टर की सलाह अनुसार साल में 1 से 2 बार डिवॉर्मिंग करना अच्छा होता है।

👉 हल्के मामलों में घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में दवा लेना जरूरी है।

👉 साफ-सफाई, स्वच्छ भोजन-पानी और समय-समय पर डिवॉर्मिंग दवा देना।

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