मेटाबोलिक अस्वस्थता: एक छुपा हुआ खतरा, जिससे 71% भारतीय हैं अनजान

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Table of Contents

🔶 मेटाबोलिक अस्वस्थता क्या है?

Metabolic aswasthata ke karan upay- मेटाबोलिक अस्वस्थता एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का शरीर बाहर से भले ही स्वस्थ दिखे, लेकिन अंदरूनी रूप से वह कई प्रकार की बीमारियों जैसे हाई ब्लड शुगर, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर या इंसुलिन रेजिस्टेंस से ग्रसित हो सकता है।  लोगों में इसके प्रति जानकारी के अभाव में यह स्थिति और भी बदतर हो सकती है क्‍योंकि इस श्रेणी में आने वाले अधिकांश लोग मेटाबोलिक स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में जानकारी नहीं रखते हैं।
ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 71% वयस्क मेटाबोलिकली अस्वस्थ  पाए गए, चाहे वे पतले हों या अधिक वजन वाले।

Metabolic aswasthata ke karan upay

🔶 मेटाबोलिक अस्वस्थता के लक्षण (Symptoms)

अक्सर इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन निम्न संकेत मिल सकते हैं:

1. थकान या सुस्ती बने रहना

जब शरीर की ऊर्जा का स्तर लगातार कम महसूस हो और हल्की मेहनत में भी थकावट हो, तो यह मेटाबोलिक असंतुलन का संकेत हो सकता है। यह स्थिति तब होती है जब शरीर की कोशिकाएं ग्लूकोज़ को ठीक से उपयोग नहीं कर पातीं, जिससे थकान, आलस्य और दिनभर की नींद जैसी समस्या बनी रहती है।

2. कमर के आसपास चर्बी जमा होना

यदि पेट और कमर के पास चर्बी लगातार बढ़ती जा रही है, तो यह इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबोलिक सिंड्रोम का लक्षण हो सकता है। यह वसा शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है और टाइप 2 डायबिटीज़ व हार्ट डिज़ीज़ के जोखिम को भी बढ़ा सकती है।

3. हाई ब्लड शुगर या डायबिटीज़ के लक्षण

खून में शुगर का स्तर बार-बार बढ़ना, मुंह सूखना, बार-बार पेशाब आना, बार-बार भूख लगना और घावों का धीरे भरना – ये सब हाई ब्लड शुगर के संकेत हो सकते हैं। ये लक्षण मेटाबोलिक असंतुलन के कारण शरीर में इंसुलिन का सही उपयोग न होने से उत्पन्न होते हैं।

4. ब्लड प्रेशर का बार-बार बढ़ना

यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार ब्लड प्रेशर बढ़ता है, तो यह भी मेटाबोलिक गड़बड़ी का लक्षण हो सकता है। यह स्थिति धमनियों में रुकावट, वजन बढ़ना, और हार्मोनल असंतुलन के कारण हो सकती है, जो लंबे समय में हृदय रोगों का कारण बन सकती है।

5. थायरॉइड या हार्मोनल गड़बड़ी

मेटाबोलिक अस्वस्थता में हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे थायरॉइड ग्रंथि का काम प्रभावित होता है। यह हाइपोथायरॉइडिज्म या हाइपरथायरॉइडिज्म का रूप ले सकता है, जिसमें वजन बढ़ना, थकान, मूड स्विंग्स, या बाल झड़ने जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं।

6. भूख में अचानक वृद्धि या कमी

अगर आपको अचानक बहुत ज्यादा भूख लगने लगे या बिल्कुल भूख न लगे, तो यह मेटाबोलिक असंतुलन का संकेत हो सकता है। यह स्थिति आमतौर पर ब्लड शुगर लेवल के अस्थिर होने, हार्मोनल उतार-चढ़ाव या इंसुलिन की कार्यप्रणाली में खराबी के कारण होती है।

🔶 मुख्य कारण (Causes)

1. बैठे-बैठे जीवनशैली (Sedentary Lifestyle)

दिनभर एक ही जगह बैठे रहने, व्यायाम न करने और शारीरिक गतिविधि की कमी से मेटाबोलिक प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे कैलोरी सही से नहीं जलतीं और शरीर में फैट जमा होने लगता है, जो आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज़ और हार्ट डिज़ीज़ जैसे रोगों को जन्म देता है।

2. प्रोसेस्ड फूड और चीनी युक्त आहार का अधिक सेवन

ज्यादा मीठा, पैकेज्ड और तला-भुना खाना शरीर के मेटाबोलिज्म को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे खाद्य पदार्थों में फाइबर की कमी और चीनी-सोडियम की अधिकता होती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ता है, इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है और मेटाबोलिक असंतुलन की स्थिति बनती है।

3. नींद की कमी

पर्याप्त और गहरी नींद न लेना हार्मोन संतुलन को बिगाड़ देता है। नींद की कमी से कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) बढ़ता है, जिससे भूख बढ़ती है और ब्लड शुगर लेवल असंतुलित हो जाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे मेटाबोलिक समस्याओं का कारण बन सकती है।

4. तनाव और मानसिक असंतुलन

लगातार तनाव में रहना और मानसिक अस्थिरता मेटाबोलिक हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित करती है। तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन अधिक बनता है, जिससे पेट के आसपास चर्बी जमा होती है और मेटाबोलिक रेट कम हो जाता है। यह डायबिटीज़ और हाई बीपी को बढ़ावा देता है।

5. धूम्रपान और शराब का सेवन

सिगरेट और शराब शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और लिवर की कार्यप्रणाली को कमजोर करते हैं। ये आदतें इंसुलिन की कार्यक्षमता को घटा सकती हैं, जिससे ब्लड शुगर बढ़ता है और शरीर का मेटाबोलिज्म बिगड़ने लगता है, जिससे मोटापा और अन्य बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं।

6. पारिवारिक या अनुवांशिक इतिहास

यदि परिवार में किसी को डायबिटीज़, थायरॉइड या हार्ट डिज़ीज़ रही हो, तो मेटाबोलिक अस्वस्थता का खतरा अधिक होता है। अनुवांशिक कारणों से शरीर में हार्मोन, मेटाबोलिज्म और फैट स्टोरेज के तरीके में गड़बड़ी हो सकती है, जिससे इन समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है।

🔶 खतरे (Health Risks)

यदि समय रहते इसका उपचार न किया जाए, तो यह आगे चलकर इन बीमारियों का रूप ले सकती है:

1. टाइप 2 डायबिटीज़

मेटाबोलिक असंतुलन इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है, जिससे शरीर की कोशिकाएं ग्लूकोज़ को ठीक से उपयोग नहीं कर पातीं। इसके परिणामस्वरूप खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है और धीरे-धीरे टाइप 2 डायबिटीज़ विकसित हो जाती है, जो कई अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है।

2. हृदय रोग (Heart Disease)

मेटाबोलिक अस्वस्थता कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को असंतुलित करती है, जिससे धमनियों में प्लाक जमने लगता है। इससे रक्त प्रवाह में बाधा आती है और हार्ट अटैक, कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ जैसी हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

3. स्ट्रोक

जब मेटाबोलिक गड़बड़ी के कारण ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल असंतुलित होते हैं, तो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है। इससे ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, जो लकवा, याददाश्त की कमी और कभी-कभी जानलेवा स्थिति का कारण बन सकता है।

4. लिवर की बीमारी

मेटाबोलिक सिंड्रोम से लिवर पर अतिरिक्त वसा जमा हो सकती है, जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ कहा जाता है। समय पर इलाज न हो तो यह लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस या सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों में बदल सकती है और लिवर की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है।

5. किडनी फेल्योर

मेटाबोलिक असंतुलन से ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर लगातार बढ़े रहने पर किडनी की रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इससे किडनी विषैले तत्वों को छानने में असमर्थ हो जाती है और धीरे-धीरे किडनी फेल्योर की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसके लिए डायलिसिस तक की जरूरत पड़ सकती है।

6. थायरॉइड असंतुलन

मेटाबोलिक अस्वस्थता हार्मोनल गड़बड़ी को जन्म देती है, जिससे थायरॉइड ग्रंथि की क्रियाशीलता प्रभावित होती है। इससे हाइपोथायरॉइडिज्म या हाइपरथायरॉइडिज्म हो सकता है, जो वजन बढ़ने, थकान, चिड़चिड़ापन, अनियमित माहवारी और मानसिक अस्थिरता जैसे लक्षणों को जन्म देता है।

🔶 पहचान कैसे करें? (Diagnosis)

मेटाबोलिक अस्वस्थता की पहचान के लिए निम्न टेस्ट किए जाते हैं:

  • Fasting Blood Sugar (FBS)
  • HbA1c टेस्ट
  • Lipid Profile (कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स आदि)
  • Blood Pressure की माप
  • BMI और Waist-Hip Ratio

🔶 इससे बचने के उपाय (Prevention Tips)

✅ 1. नियमित व्यायाम करें

– प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तेज चलना, योग, साइकलिंग या स्ट्रेचिंग करें।

✅ 2. आहार में बदलाव करें

– फाइबर युक्त भोजन लें जैसे दलिया, फल, हरी सब्जियाँ।
– चीनी, सफेद चावल और तले हुए भोजन से दूरी बनाएं।
– प्रोसेस्ड फूड और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन न करें।

✅ 3. पर्याप्त नींद लें

– रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लें।

✅ 4. स्ट्रेस को कंट्रोल करें

– ध्यान, प्राणायाम और म्यूजिक थेरेपी अपनाएं।

✅ 5. नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं

– साल में एक बार बेसिक हेल्थ चेकअप ज़रूरी है, भले ही आप फिट महसूस करते हों।

🔶 आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय

1. मेथी दाना पानी (सुबह खाली पेट 1 गिलास)

रातभर पानी में भीगे हुए 1 चम्मच मेथी दाने को सुबह खाली पेट पीने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है और पाचन क्रिया सुधरती है। इसमें घुलनशील फाइबर होता है जो इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाकर मेटाबोलिज्म को सक्रिय करता है और चर्बी घटाने में सहायक होता है।

2. आंवला रस (इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार)

आंवला रस में भरपूर मात्रा में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। यह लिवर डिटॉक्स, ब्लड शुगर कंट्रोल और थायरॉइड बैलेंस में सहायक होता है। रोज़ाना सुबह एक चम्मच आंवला रस पानी के साथ पीना लाभदायक है।

3. त्रिफला चूर्ण (पाचन तंत्र और शुगर को नियंत्रित करता है)

हरड़, बहेड़ा और आंवला से बना त्रिफला चूर्ण पेट साफ करने, टॉक्सिन्स निकालने और मेटाबॉलिक क्रिया को दुरुस्त करने में मदद करता है। यह ब्लड शुगर के स्तर को स्थिर रखने में सहायक होता है और मोटापे व थकान जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।

4. दालचीनी (रक्त शर्करा को संतुलित करने में मदद करता है)

दालचीनी में मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड्स इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है और शरीर के ऊर्जा स्तर को बनाए रखता है। एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच दालचीनी मिलाकर रोज़ सुबह सेवन करना मेटाबोलिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

🔶 मेटाबोलिक अस्वस्थता बनाम मोटापा

जरूरी नहीं कि हर मोटा व्यक्ति मेटाबोलिकली अनहेल्दी हो और जरूरी नहीं कि हर पतला व्यक्ति हेल्दी हो। मोटापा केवल शरीर में अतिरिक्त चर्बी का जमा होना है, जबकि मेटाबोलिक अस्वस्थता एक ऐसी स्थिति है जिसमें ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और पाचन क्रिया असंतुलित हो जाती है। मोटापा मेटाबोलिक अस्वस्थता का एक कारण हो सकता है, पर हर मोटा व्यक्ति मेटाबोलिक रूप से अस्वस्थ नहीं होता और न ही हर दुबला व्यक्ति मेटाबोलिक रूप से स्वस्थ होता है। मेटाबोलिक असंतुलन बिना मोटापे के भी हो सकता है और यह अधिक गंभीर बीमारियों का संकेतक बन सकता है। इसलिए केवल वजन नहीं, बल्कि शरीर के भीतर की कार्यप्रणाली को भी समझना ज़रूरी है।

मेटाबोलिक अस्वस्थता से जुड़े सामान्य प्रश्न

👉 हाँ, यह लाइफस्टाइल में बदलाव और नियमित जांच के माध्यम से पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

👉 नहीं, कई बार डायबिटीज़ के बिना भी शरीर में मेटाबोलिक असंतुलन हो सकता है।

👉 जी हाँ, फास्ट फूड और मोबाइल पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों में यह खतरा बढ़ता जा रहा है।

👉 नहीं, वजन के साथ-साथ आहार, नींद, मानसिक स्थिति और ब्लड रिपोर्ट्स भी अहम हैं।

👉 कुछ मामलों में घरेलू उपाय लाभकारी हैं, लेकिन गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।

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